विसंगती सदा मिळो , टुकार विडंबन कानी पडो !!!! *****
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---------------निवेदन ---------------------------------------------------------
.....इथे सादर करण्यात आलेल लेखन/ कविता / विडम्बने / विचार प्रासंगिक असून याद्वारे कुठल्याही व्यक्ती, पक्ष, नेते , जात , धर्म, पंथ , राष्ट्र , संस्था , आदरस्थान यांची कुचेष्टा करण्याचे किंवा कुणाच्याही भावना दुखवण्याचे कुठलेही प्रयोजन नाही. या सर्व आरोळ्या या विरंगुळा या सदरात मोडतात, आणि केवळ मनोरंजन व थोडीशी खुशखुशीत टीका - टिप्पणी हा उद्देश आहे. रसिकांना इथल्या कलाकृती आवडतील अशी आशा व्यक्त करतो.--------------------------------------------------------------------------------------

......... आपला /
अमोल केळकर /
a.kelkar9@gmail.com

Friday, June 29, 2018

लाह्या लाह्या अखंड खाऊया!


*पाॅपक्राॅन* 🍿
( चाल: धागा धागा अखंड विणूया, विठ्ठल विठ्ठल मुखे म्हणूया)

लाह्या लाह्या अखंड खाऊया!
पिक्चर पिक्चर तिथे बघूया !!

साॅल्ट चिजचे,  टोमॅटोचे!
भलत्या किंमतीत घ्यावे लागे!
विविधढंगी पाॅपक्राॅनचे!
खोके घेऊनि पांडू रंगे!
कुटुंबवत्सल जो तो दिसला!
मध्यारंभी नित्य चराया!!

लाह्या लाह्या अखंड खाऊया!
पिक्चर पिक्चर तिथे बघूया !!

काॅंन्टरवरच्या रांगेभोवती!
मनामनातले हिशोब टाका!
देऊन कार्ड त्यांच्या हाती!
अर्धी उघडी लाज राखा "
खादाडीचा घेऊन चर खा!
मल्टीप्लेक्सचे गीत गाऊया!!


लाह्या लाह्या अखंड खाऊया!
पिक्चर पिक्चर तिथे बघूया !!

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