विसंगती सदा मिळो , टुकार विडंबन कानी पडो !!!! *****
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---------------निवेदन ---------------------------------------------------------
.....इथे सादर करण्यात आलेल लेखन/ कविता / विडम्बने / विचार प्रासंगिक असून याद्वारे कुठल्याही व्यक्ती, पक्ष, नेते , जात , धर्म, पंथ , राष्ट्र , संस्था , आदरस्थान यांची कुचेष्टा करण्याचे किंवा कुणाच्याही भावना दुखवण्याचे कुठलेही प्रयोजन नाही. या सर्व आरोळ्या या विरंगुळा या सदरात मोडतात, आणि केवळ मनोरंजन व थोडीशी खुशखुशीत टीका - टिप्पणी हा उद्देश आहे. रसिकांना इथल्या कलाकृती आवडतील अशी आशा व्यक्त करतो.--------------------------------------------------------------------------------------

......... आपला /
अमोल केळकर /
a.kelkar9@gmail.com

Tuesday, July 31, 2018

बटन तुझे दाबता


नगरसेवक,  EVM मशिन्स, काॅमन मॅन  यांच्यातील नाते आजच्या काही शहरांच्या महानगरपालिका निवडणुकी निमित्ताने :-

( चाल: प्रथम तुजं पाहता )


बटण तुझे दाबता 'हात' वेडावला

समजुनी घेतले महा रथींनी तुला

स्पर्श होता तुझा भांभावलो आज मी

कुंद खोलीतला प्राशिला गंध मी
करूनी मत दान निघुनी का चालला

जाग झोपेतुनी मजसी ये जेधवा

जवळुनी सेवकासी पाहिले तेथवा
सावध वार्डपती तो क्षणभरी थांबला..

बटण तुझे दाबता...


📝 १/८/१८

poetrymazi.blogspot.in
विसंगती सदा मिळो
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मुळ गाणे :
प्रथम तुझ पाहता जीव वेडावला
उचलुनी घेतले नीज रथी मी तुला

स्पर्श होता तुझा विसरलो भान मी

धुंद श्वासातला प्राशिला गंध मी
नयन का देहही मिटुनी तू घेतला

जाग धुंदीतुनी मजसी ये जेधवा

कवळुनी तुजसी मी चुंबिले तेथवा
धावता रथपती पळ भरी थांबला

प्रथम तुझ पाहता
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